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स्यामल गुलामी मैं कवि बन गया अमृत तृप्त नारी शापित शीश इश्क पति हिमगिरि आँचल hindi kavita रूठना बनाना समेटी और पापों अमर

Hindi शिव और गौरा बन पावन घर बनाना Poems